वडहंसु महला १ ॥
आवहु मिलहु सहेलीहो सचड़ा नामु लएहां ॥ रोवह बिरहा तन का आपणा साहिबु सम्हालेहां ॥ साहिबु सम्हालिह पंथु निहालिह असा भि ओथै जाणा ॥ जिस का कीआ तिन ही लीआ होआ तिसै का भाणा ॥ जो तिनि करि पाइआ सु आगै आइआ असी कि हुकमु करेहा ॥ आवहु मिलहु सहेलीहो सचड़ा नामु लएहा ॥१॥ मरणु न मंदा लोका आखीऐ जे मरि जाणै ऐसा कोइ ॥ सेविहु साहिबु सम्रथु आपणा पंथु सुहेला आगै होइ ॥ पंथि सुहेलै जावहु तां फलु पावहु आगै मिलै वडाई ॥ भेटै सिउ जावहु सचि समावहु तां पति लेखै पाई ॥ महली जाइ पावहु खसमै भावहु रंग सिउ रलीआ माणै ॥ मरणु न मंदा लोका आखीऐ जे कोई मरि जाणै ॥२॥ मरणु मुणसा सूरिआ हकु है जो होइ मरनि परवाणो ॥ सूरे सेई आगै आखीअहि दरगह पावहि साची माणो ॥ दरगह माणु पावहि पति सिउ जावहि आगै दूखु न लागै ॥ करि एकु धिआवहि तां फलु पावहि जितु सेविऐ भउ भागै ॥ ऊचा नही कहणा मन महि रहणा आपे जाणै जाणो ॥ मरणु मुणसां सूरिआ हकु है जो होइ मरहि परवाणो ॥३॥ नानक किस नो बाबा रोईऐ बाजी है इहु संसारो ॥ कीता वेखै साहिबु आपणा कुदरति करे बीचारो ॥ कुदरति बीचारे धारण धारे जिनि कीआ सो जाणै ॥ आपे वेखै आपे बूझै आपे हुकमु पछाणै ॥ जिनि किछु कीआ सोई जाणै ता का रूपु अपारो ॥ नानक किस नो बाबा रोईऐ बाजी है इहु संसारो ॥४॥२॥ {पन्ना 579-580}
अर्थ: हे सहेलियो! (हे सत्संगी सज्जनों!) आओ, मिल के बैठें और परमात्मा का सदा स्थिर रहने वाला नाम सिमरें। आओ, प्रभू से अपने विछोड़े का बारंबार अफसोस से चेता करें, (वह वियोग दूर करने के लिए) मालिक प्रभू को याद करें। आओ, हम मालिक को दिल में बसाएं, और उस रास्ते को देखें (जिस रास्ते सब जा रहे हैं)। हमने भी (आखिर) उस परलोक में जाना है (जहाँ अनेकों जा चुके हैं)। (किसी के मरने पर रोना व्यर्थ है) जिस प्रभू का ये पैदा किया हुआ था, उसने जीवात्मा वापस ले ली है, उसकी की रजा हुई है। यहाँ जगत में जीव ने जो कुछ किया, (मरने पर) उसके आगे आ जाता है। (इस ईश्वरीय नियम के आगे) हमारा कोई जोर नहीं चल सकता।
(इस वास्ते) हे सहेलियो! आओ, मिल के बैठें और सदा स्थिर रहने वाले प्रभू का नाम सिमरें।1।
हे लोगो! मौत को बुरा ना कहो (मौत अच्छी है, पर तब ही) अगर कोई मनुष्य उस तरीके से (जी के) मरना जानता हो। (वह तरीका ये है कि) अपने सर्व-शक्तिमान मालिक को सिमरो, (ताकि जीवन के सफर में) रास्ता आसान हो जाए (सिमरन की बरकति से) आसान जीवन-राह पर चलोगे तो इसका फल भी मिलेगा प्रभू की हजूरी में सम्मान मिलेगा। अगर प्रभू के नाम की भेटा ले के जाओगे तो उस सदा स्थिर प्रभू में एक-रूप हो जाओगे, किए कर्मों के हिसाब के समय इज्जत मिलेगी, प्रभू की हजूरी में स्थान प्राप्त करोगे, और पति-प्रभू को अच्छे लगोगे। (जो जीव ये भेटा ले के जाता है वह) प्रेम से आत्मिक आनंद लेता है।
हे लोगो! मौत को बुरा ना कहो (पर इस बात को वही समझता है) जो इस तरह मरना जानता हो।2।
जो मनुष्य (जीते जी ही प्रभू की नजरों में) कबूल हो के मरते हैं वे शूरवीर हैं उनका मरना भी (लोक-परलोक में) सराहा जाता है। प्रभू की हजूरी में वही बंदे सूरमे कहे जाते हैं, वही बंदे सदा स्थिर प्रभू की दरगाह में आदर पाते हैं। वे दरगाह में सम्मान पाते हैं, सम्मान से (यहाँ से) जाते हैं और आगे परलोक में उन्हें कोई दुख नहीं व्यप्तता। वे लोग परमात्मा को (हर जगह) व्यापक समझ के सिमरते हैं, उस प्रभू के दर से फल प्राप्त करते हैं जिसका सिमरन करने से (हरेक किस्म का) डर दूर हो जाता है।
(हे भाई!) अहंकार के बोल नहीं बोलने चाहिए, अपने आप को काबू में रखना चाहिए, वह अंतरजामी प्रभू हरेक के दिल की खुद ही जानता है।
जो मनुष्य (जीते जी ही प्रभू की नजरों में) कबूल हो के मरते हैं वे शूरवीर है, उनका मरना (लोक-परलोक में) सराहा जाता है।3।
हे नानक! (कह–) हे भाई! ये जगत एक खेल है (खेल बनती-बिगड़ती ही रहती है) किसी के मरने पर रोना व्यर्थ है। मालिक प्रभू अपने पैदा किए जगत की स्वयं ही संभाल करता है, अपनी रची हुई रचना का खुद ही ध्यान रखता है। प्रभू अपनी रची रचना का ख्याल रखता है, इसको आसरा सहारा देता है, जिसने जगत रचा है वही इसकी जरूरतें भी जानता है। प्रभू स्वयं ही सबके किए कर्मों को देखता है, खुद ही सबके दिलों की समझता है, खुद ही अपने हुकम को पहचानता है (कि कैसे ये हुकम जगत में बरता जाना है)।
जिस प्रभू ने ये जगत-रचना की हुई है वही इसकी जरूरतें (भी) जानता है। उस प्रभू का स्वरूप बेअंत है।
हे नानक! (कह–) हे भाई! ये जगत एक खेल है (यहाँ जो घड़ा गया है उसने टूटना भी है) किसी के मरने पर रोना व्यर्थ है।4।2।



