Rojana Hukamnama (HINDI) Gurudwara Moti Bagh Sahib Delhi – 7-5-26

देवगंधारी ॥
अब हम चली ठाकुर पहि हारि ॥ जब हम सरणि प्रभू की आई राखु प्रभू भावै मारि ॥१॥ रहाउ॥ लोकन की चतुराई उपमा ते बैसंतरि जारि ॥ कोई भला कहउ भावै बुरा कहउ हम तनु दीओ है ढारि ॥१॥ जो आवत सरणि ठाकुर प्रभु तुमरी तिसु राखहु किरपा धारि ॥ जन नानक सरणि तुमारी हरि जीउ राखहु लाज मुरारि ॥२॥४॥

अर्थ: अब मैं और सारे आसरे छोड़ के मालिक प्रभु की शरण आ गई हूँ। जब कि अब, हे प्रभु! मैं तेरी शरण आ गई हूँ, चाहे मुझे रख चाहे मार (जैसी तेरी रजा है मुझे उसी हाल रख)।1। रहाउ।

दुनिया वाली समझदारी, और दुनियावी बड़प्पन-इन्हें मैंने आग में जला दिया है। चाहे मुझे कोई अच्छा कहे चाहे कोई बुरा कहे, मैंने तो अपना शरीर (ठाकुर के चरणों में) भेट कर दिया है।1।

हे मालिक! हे प्रभु! जो भी कोई (भाग्यशाली) तेरी शरण आ पड़ता है, तू मेहर करके उसकी रक्षा करता है। हे दास नानक! (कह:) हे हरि जी! हे मुरारी! मैं तेरी शरण आया हूँ, मेरी इज्जत रख।2।4।

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