Rojana Hukamnama (HINDI) Gurudwara Moti Bagh Sahib Delhi – 25-2-26

सूही महला ५ ॥
जा कै दरसि पाप कोटि उतारे ॥ भेटत संगि इहु भवजलु तारे ॥१॥ ओइ साजन ओइ मीत पिआरे ॥ जो हम कउ हरि नामु चितारे ॥१॥ रहाउ ॥ जा का सबदु सुनत सुख सारे ॥ जा की टहल जमदूत बिदारे ॥२॥ जा की धीरक इसु मनहि सधारे ॥ जा कै सिमरणि मुख उजलारे ॥३॥ प्रभ के सेवक प्रभि आपि सवारे ॥ सरणि नानक तिन्ह सद बलिहारे ॥४॥७॥१३॥ {पन्ना 739}

अर्थ: हे भाई! जो (संत जन) मुझे परमात्मा का नाम याद करवाते हैं वह (ही) मेरे सज्जन हैं, वह (ही) मेरे प्यारे मित्र हैं।1। रहाउ।

हे भाई! (वह संत जन ही मेरे प्यारे मित्र हैं) जिनके दर्शनों से करोड़ों पाप उतर जाते हैं, (जिन के चरणों) को छूने से संसार-समुंदर से पार लांध जाया जाता है।1।

हे भाई! (वही हैं मेरे मित्र) जिनके वचन सुन के सारे सुख प्राप्त हो जाते हैं, जिनकी टहल करने से जमदूत (भी) नाश हो जाते हैं।2।

हे भाई! (वही हैं मेरे मित्र) जिन के द्वारा (दिया हुआ) धीरज (मेरे) इस मन को सहारा देता है, जिन (के दिए हुए हरी-नाम) के सिमरन से (लोक-परलोक में) मुँह उज्जवल होता है।3।

हे नानक! प्रभू ने स्वयं ही अपने सेवकों का जीवन सुंदर बना दिया है। हे भाई! उन सेवकों की शरण पड़ना चाहिए, उन पर से सदा कुर्बान होना चाहिए।4।7।13।

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