Rojana Hukamnama (HINDI) Gurudwara Moti Bagh Sahib Delhi – 10-5-26

सोरठि महला ५ ॥
परमेसरि दिता बंना ॥ दुख रोग का डेरा भंना ॥ अनद करहि नर नारी ॥ हरि हरि प्रभि किरपा धारी ॥१॥ संतहु सुखु होआ सभ थाई ॥ पारब्रहमु पूरन परमेसरु रवि रहिआ सभनी जाई ॥ रहाउ ॥ धुर की बाणी आई ॥ तिनि सगली चिंत मिटाई ॥ दइआल पुरख मिहरवाना ॥ हरि नानक साचु वखाना ॥२॥१३॥७७॥ {पन्ना 628}

अर्थ: हे संत जनो! (जिस मनुष्य को ये यकीन हो जाता है कि) पारब्रहम पूरन परमेश्वर हर जगह पर मौजूद है (उस मनुष्य को) सब जगहों में सुख ही प्रतीत होता है। रहाउ।

हे संत जनो! (जिस मनुष्य के आत्मिक जीवन के लिए) परमेश्वर ने (विकारों के रास्ते पर) रुकावट खड़ी कर दी, (उस मनुष्य के अंदर से) परमेश्वर ने दुखों और रोगों का डेरा ही खत्म कर दिया। जिन जीवों पर प्रभू ने (ये) कृपा कर दी वे सारे जीव आत्मिक आनंद पाते हैं।1।

हे संत जनो! परमात्मा की सिफत सालाह की बाणी जिस मनुष्य के अंदर आ बसी, उसने अपनी सारी चिंता दूर कर ली। हे नानक! दया का श्रोत प्रभू उस मनुष्य पर मेहरवान हुआ रहता है, वह मनुष्य उस सदा कायम रहने वाले प्रभू का नाम (हमेशा) उचारता है।2।13।77।

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