Rojana Hukamnama (HINDI) Gurudwara Moti Bagh Sahib Delhi – 14-10-25

सूही महला ५ ॥
जिनि मोहे ब्रहमंड खंड ताहू महि पाउ ॥ राखि लेहु इहु बिखई जीउ देहु अपुना नाउ ॥१॥ रहाउ ॥ जा ते नाही को सुखी ता कै पाछै जाउ ॥ छोडि जाहि जो सगल कउ फिरि फिरि लपटाउ ॥१॥ करहु क्रिपा करुणापते तेरे हरि गुण गाउ ॥ नानक की प्रभ बेनती साधसंगि समाउ ॥२॥३॥४३॥ {पन्ना 745}

अर्थ: हे प्रभू! जिस (माया) ने सारी सृष्टि के सारे देश अपने प्यार में फसाए हुए हैं, उसी (माया) के वश में मैं भी पड़ा हुआ हूँ। हे प्रभू! मुझे अपना नाम बख्श, और मुझे इस विकारी जीव को (माया के चुंगल से) बचा ले।1। रहाउ।

हे प्रभू! मैं भी उस (माया) के पीछे (बार-बार) जाता हूँ जिससे कभी भी कोई भी सुखी नहीं हुआ। मैं बार-बार (उन पदार्थों से) चिपकता हूँ, जो (आखिर) सभी को छोड़ जाते हैं।1।

हे तरस के मालिक! हे हरी! (मेरे पर) मेहर कर, मैं तेरे गुण गाता रहूँ। हे प्रभू! (तेरे सेवक) नानक की (तेरे आगे यही) विनती है कि मैं साध-संगति में टिका रहूँ।2।3।43।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like these