Rojana Hukamnama (HINDI) Gurudwara Moti Bagh Sahib Delhi – 16-7-25

टोडी महला ५ ॥
हरि हरि चरन रिदै उर धारे ॥ सिमरि सुआमी सतिगुरु अपुना कारज सफल हमारे ॥१॥ रहाउ ॥ पुंन दान पूजा परमेसुर हरि कीरति ततु बीचारे ॥ गुन गावत अतुल सुखु पाइआ ठाकुर अगम अपारे ॥१॥ जो जन पारब्रहमि अपने कीने तिन का बाहुरि कछु न बीचारे ॥ नाम रतनु सुनि जपि जपि जीवा हरि नानक कंठ मझारे ॥२॥११॥३०॥ {पन्ना 718}

अर्थ: हे भाई! परमात्मा के चरण सदा अपने हृदय में संभाल के रख। अपने गुरू को, मालिक प्रभू को सिमर के हम जीवों के सारे काम सिरे चढ़ सकते हैं।1। रहाउ।

हे भाई! सारी विचारों का निचोड़ ये है कि परमात्मा की सिफत सालाह ही परमात्मा की पूजा है, और दान पुंन है। अपहुँच और बेअंत मालिक-प्रभू के गुण गा के बेअंत सुख प्राप्त कर लेने हैं।1।

हे भाई! जिन मनुष्यों को परमात्मा ने अपने (सेवक) बना लिया उनके कर्मों का फिर लेखा नहीं पूछता। हे नानक! (कह–) मैंने भी परमात्मा के रत्न (जैसे कीमती) नाम को अपने गले से परो लिया है, नाम सुन-सुन के जप-ज पके मैं आत्मिक जीवन प्राप्त कर रहा हूँ।2।11।30।

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